नाम-- शमशेर खान
उम्र ९० साल
नागरिक- पाकिस्तान
करीब २५ साल कि उम्र रही होगी वो राजस्थान के झुंझुनू जिले से किसी काम के सिलसिले सिंध गए और तभी देश का बंटवारा हो गया और शमशेर पकिस्तान ही रह गए और उनकी पत्नी सलामत बानो और बच्चे भारत में ही रह गए| पिछले चालीस सालों में पाँच बार ही वो भारत आ पायें है अपने परिवार से मिलने को| ९० साल के शमशेर के हाथ में वीजा पासपोर्ट और अर्जी है उन्होंने अर्जी में बुढ़ापा और बीमारी का हवाला देकर झुंझुनू ( राजस्थान) के जिला कलेक्टर से भारतीय नागरिकता के लिए गुहार लगाई है| उन्हें एक महीने का पर्यटन वीजा मिला है और उनका पूरा परिवार चिंतित है इस एक माह के बाद क्या होगा?
क्या भारत सरकार को शमशेर जैसे लोगों के आवेदन पर सहानुभूति से विचार नहीं करना चाहिए? क्योंकि उनका कोई भी परिजन पाकिस्तान में नहीं है तो कौन उनकी परवरिश करेगा?
एक इंसान को अपनी पसंद के मुल्क में रहने का हक है और ये मानवाधिकारों में आता है. क्या हमें ऐसे मामलो में मानवीय रुख अपनाना नहीं चाहिए और शमशेर को भारत में रहने की अनुमति दे देनी चाहिए?
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