मंगलवार, 5 जुलाई 2011

जीने की उम्मीद


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रविवार, 26 जून 2011

मौजूदा हालात

आज देश में जो हालात बने हुए है उसे देखकर कभी कभी दुखी हो जाता हूँ, क्या  हो रहा है इस देश में, क्या हमारे पूर्वजों ने ऐसे ही भारत की कल्पना की थी यकिनन नहीं तो फिर ऐसी  हालात बनाने बाले कौन है। सबसे पहले तो मै अपने आप को ही दोषी मानता हूँ आज के दौर में हम इतने मतलबी हो गए है की जबतक कोई चीजे खुद के साथ न घट जाय तबतक हम उस चीज़ को समझ  ही नही पाते है।  हमने अपने अधिकार को खो दिया है या कहा जाय या हमने उसे भुला दिया है हम सिर्फ पाँच साल में एक वोट देकर अपने कर्त्तव्य से विमुक्त हो जाते है और देश को उन प्रतिनिधि के रहमोकरम पर छोड़ देते है और वो देश का कबाड़ा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है 
लेकिन अब हमें एक बार फिर से सोचना होगा, अब हमें आवाज बुलंद करना ही होगा और जो गलत करते है उनके खिलाफ बिगुल फूकना ही होगा  हम अब चुप  नहीं बैठ सकते क्यूंकि अब अगर चुप बैठ गए तो फिर हम किसी और को दोष नहीं दे सकते  आज दश में काला धन, भ्रष्‍टाचार पर  काफी बहस हो रही है, मै इन बातो को दोहराना  नहीं चाहता पर इतना जरुर कहूँगा की जो कोई भी दोषी है उसे कानून के दायरे में लाया  जाये और सख्त से सख्त सजा दिलाया जाय पर पता नहीं सरकार इस मसले पर बिलकुल चुप क्यूँ बैठी है लेकिन जनता ने आपको वह इसलिए नहीं बैठाया है की आप मूकदर्शक बने रहो अगर जनता ने वहां तक पहुचायां है तो वो वह से आपको हटाना भी जानती है 
इसलिए जनता के सर्व का इम्तिहान  मत लो क्यूंकि अगर ये अपने पे आ गए तो आप कहीं के नहीं रहोगे